मोदी सरकार ने दुश्मनों से निपटने के लिए सेना को वैसे तो कई तरह के आधुनिक हथियार और बुलेट प्रूफ जैकेट दे ही रही है, मगर इस बार सरकार ने एक ऐसा जबरदस्त फैसला लिया है, जिससे दुश्मनों में तबाही मचाने के लिए भारतीय सेना को काफी सहायता मिलने जा रही है. भारतीय सेना को मिलने जा रहे इस हथियार का जवाब चीन और पाकिस्तान सेना के पास भी नहीं है.

बुलेट प्रूफ बंकरों से करेंगे दुश्मनों का विनाश
दरअसल अब भारतीय सेना ऐसे बंकर बनाने जा रही है जो पोर्टेबल और बुलेट प्रूफ हों. पत्थर और मिट्टी के बंकरों की जगह पर ऐसे बंकरों का निर्माण किया जाएगा, जो स्टील के हों और मजबूत हों. पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से मोर्चा लेने वाले जवानों को ऐसे बंकर मिलने से वो दुश्मन के हमले से सुअक्षित रह सकेंगे और मजबूती से दुशमन पर धावा बोल सकेंगे.

नए बंकरो के निर्माण का उद्देश्य सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना है. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा मात्रा में बुलेटप्रूफ सामान का प्रयोग किया जाएगा, जिनमें जैकेट और गाड़ियां भी शामिल हैं. यानी बंकर भी बुलेट प्रूफ होंगे, साथ ही जवान बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होंगे और उनकी गाड़ियां भी बख्तरबंद होंगी, जो दुश्मन की गोलियां आसानी से झेल जाएंगी और जवानों की जान बचा लेंगी.

बता दें कि कांग्रेस ने अपने 60 साल के राज में सेना के जवानों की सुरक्षा की ओर कभी कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया. जवान मिटटी व् पत्थरों के बंकरों से दुश्मन से लोहा लेते आये हैं और ऐसे बंकरों के कमजोर होने के कारण जवानों को असमय ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ता था.

बता दें कि इस वक्त सेना में 2 तरह के बंकर इस्तेमाल किए जाते हैं. पत्थर और मिट्टी वाले बंकर मजबूती के लिहाज से ठीक नहीं होते. दुश्मनों का हमला झेलने की इनकी क्षमता नहीं होती और जल्द ही ध्वस्त हो जाते हैं. दूसरे बंकर स्टील वाले होते हैं, जिनका निर्माण मुश्किल होता है. इन स्टील के बंकरों पर दुश्मन की गोलियों का असर नहीं होता और इनमे कुछ ऐसे छेद बने होते हैं, जिनसे जवान दुश्मनों पर गोलियां चलाते हैं.

मिटटी के नहीं, फौलाद के होंगे बंकर
सेना के इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था और चाक-चौबंद करने के साथ सेना को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार करना है. विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम कर सेना को घरेलू हालात में और मजबूत बनाना ही भारतीय सेना की प्राथमिकता है.

मगर अब कोयटंबूर की अमृता यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे बंकर मॉडल का निर्माण किया है, जो हल्के स्टील से बना है और बीच में प्लाइवुड का इस्तेमाल किया गया है, ये बंकर बनाने आसान भी हैं और जवानों की रक्षा करने में भी बेहतरीन हैं. सेना को ये बंकर मिलने से हर जवान की ताकत कई गुना तक बढ़ जायेगी.

नए बंकरो के निर्माण का उद्देश्य सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना है. इसके लिए ज्यादा से ज्यादा मात्रा में बुलेटप्रूफ सामान का प्रयोग किया जाएगा, जिनमें जैकेट और गाड़ियां भी शामिल हैं. यानी बंकर भी बुलेट प्रूफ होंगे, साथ ही जवान बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होंगे और उनकी गाड़ियां भी बख्तरबंद होंगी, जो दुश्मन की गोलियां आसानी से झेल जाएंगी और जवानों की जान बचा लेंगी.

बता दें कि कांग्रेस ने अपने 60 साल के राज में सेना के जवानों की सुरक्षा की ओर कभी कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया. जवान मिटटी व् पत्थरों के बंकरों से दुश्मन से लोहा लेते आये हैं और ऐसे बंकरों के कमजोर होने के कारण जवानों को असमय ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ता था.

बता दें कि इस वक्त सेना में 2 तरह के बंकर इस्तेमाल किए जाते हैं. पत्थर और मिट्टी वाले बंकर मजबूती के लिहाज से ठीक नहीं होते. दुश्मनों का हमला झेलने की इनकी क्षमता नहीं होती और जल्द ही ध्वस्त हो जाते हैं. दूसरे बंकर स्टील वाले होते हैं, जिनका निर्माण मुश्किल होता है. इन स्टील के बंकरों पर दुश्मन की गोलियों का असर नहीं होता और इनमे कुछ ऐसे छेद बने होते हैं, जिनसे जवान दुश्मनों पर गोलियां चलाते हैं.

बता दें कि कांग्रेस ने अपने 60 साल के राज में सेना के जवानों की सुरक्षा की ओर कभी कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया. जवान मिटटी व् पत्थरों के बंकरों से दुश्मन से लोहा लेते आये हैं और ऐसे बंकरों के कमजोर होने के कारण जवानों को असमय ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ता था.

बता दें कि इस वक्त सेना में 2 तरह के बंकर इस्तेमाल किए जाते हैं. पत्थर और मिट्टी वाले बंकर मजबूती के लिहाज से ठीक नहीं होते. दुश्मनों का हमला झेलने की इनकी क्षमता नहीं होती और जल्द ही ध्वस्त हो जाते हैं. दूसरे बंकर स्टील वाले होते हैं, जिनका निर्माण मुश्किल होता है. इन स्टील के बंकरों पर दुश्मन की गोलियों का असर नहीं होता और इनमे कुछ ऐसे छेद बने होते हैं, जिनसे जवान दुश्मनों पर गोलियां चलाते हैं.

मिटटी के नहीं, फौलाद के होंगे बंकर
सेना के इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था और चाक-चौबंद करने के साथ सेना को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार करना है. विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम कर सेना को घरेलू हालात में और मजबूत बनाना ही भारतीय सेना की प्राथमिकता है.

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