राज्यसभा सांसदों की प्रक्रिया और उसके बाद जीत के लिए राजनीतिक पार्टियों के आंकड़ों को लेकर मीडिया में बहुत चर्चा हुई. अब मीडिया में एक बार फिर से राज्यसभा सांसदों को लेकर चर्चा हो रही है. इस बार 2 अप्रैल को जिन 58  राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है उनकी उपस्थिति को लेकर की जा रही है. इन सांसदों की उपस्थिति के आकंडे देखकर आप दंग रह जाएंगे.

आपको बता दें कि 2 अप्रैल को राज्यसभा के 58 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है.  इसलिए किस सांसद ने अपने कार्यकाल में क्या किया है, इसका विश्लेषण भी शुरू हो गया है. राज्यसभा की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के अनुसार जो 58 राज्यसभा सांसद रिटायर हो रहे हैं, उनमें भाजपा के सांसदों की ऊपरी सदन में उपस्थिति सबसे ज्यादा 90 प्रतिशत रही. वहीँ अगर बात व्यक्तिगत रूप  की करें तो उनमें सबसे ज्यादा 99 प्रतिशत उपस्थिति कर्नाटक के सांसद रामकृष्ण रांग्याश्री की रही. वहीं बीजेपी के सबसे कम 72 प्रतिशत उपस्थिति महाराष्ट्र के अजय संचेती की रही.

इसी के साथ ही अगर बात कांग्रेस पार्टी के सांसदों की करें तो उनमें सबसे ज्यादा उपस्थिति तेलंगाना के आनंद भास्कर रापोलू की दर्ज की. जबकि सबसे कम 32 प्रतिशत उपस्थिति कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के चिरंजीवी की रही.संयोग से अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी की उपस्थिति सांसदों में सबसे खराब रही. उन्होंने केवल दो बहसों में हिस्सा लिया.

चिरंजीवी ने अपने कार्यकाल में एक भी प्रश्न नहीं पूछा और एक भी प्रस्ताव पेश नहीं किया. इसी के साथ ही क्षेत्रीय दलों के तीन वरिष्ठ नेता बहसों में सबसे आगे रहे.

बहस की बात करें तो उनमें समाजवादी पार्टी के दर्शन सिंह सूची में सबसे ऊपर रहे उन्होंने 667 बहसों में भाग लिया. उनके बाद बीजेडी के दिलीप टिर्की का नंबर रहा. भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान ने 379 बहसों में भाग लिया. सीपीआई(एम) के तपन कुमार सेन 346 बहसों का हिस्सा रहे.

 

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