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देशभर में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने की तैयारी…

केंद्र गवर्नमेंट देशभर में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने की तैयारी में है. इसमें  खेत, प्लॉट वजमीन के हरेक टुकड़े को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा, जिसमें सेंध लगाना या छेड़छाड़ मुमकिन नहीं होगा. यह व्यवस्था नागरिकों को मुहैया कराए जा रहे आधार नंबर जैसी ही होगी लेकिन इसके लिए किसी को अंगुलियों के निशान या आंखों की पहचान नहीं देनी होगी. { अधिक जानकारी के लिए देखें नीचे दी गई वीडियो }

इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को जमीन के रिकॉर्ड डिजिटल करने की योजना पर चिट्ठी लिखी है. मध्य प्रदेश, राजस्थान व गुजरात समेत 6 राज्यों ने इस पर अपनी सहमति भी जता दी है. आईटी मंत्रालय के मुताबिक इस व्यवस्था से बेनामी संपत्ति, भूमि टकराव व जमीन के फर्जीवाड़ों के बढ़ते मामलों पर अंकुश लग सकेगा. इसके डेटा को आधार की तर्ज पर सुरक्षित किया जाएगा.

एक विशिष्ट नंबर जमीन के हरेक टुकड़े का होगा जो  सरकारी, निजी, संस्थान, कंपनी या विरासत की संपत्ति की श्रेणी पर आधारित होगा. मंत्रालय के एक ऑफिसर के मुताबिक राष्ट्र में कृषि, ढांचागत विकास व पर्यावरण को हो रहे नुकसान की जानकारी इस माध्यम के जरिए सरलता से जुटाई जा सकेगी. जबकि कृषि, व्यक्तिगत या व्यवसायिक भूमि से हो रही आय का भी पता जमीन के विशिष्ट पहचान डेटा की सहायता से लगाया जा सकेगा.

शुरू हो गया है डिजिटल इंडिया का दूसरा चरण:-

आईटी मंत्रालय के मुताबिक डिजिटल इंडिया के दूसरे चरण में राष्ट्रीय डिजिटल भूमि पहचान नंबर बनाने का लक्ष्य रखा है. मंत्रालय के एक वरिष्ठ ऑफिसर के मुताबिक गवर्नमेंट जून माह के मध्य में इस व्यवस्था की घोषणा कर सकती है. यह एक अहम कदम है जिससे जमीन की धोखाधड़ी, बेनामी संपत्ति व विवादों के निपटारे में सहूलियत होगी. ऑफिसर ने बोला कि जमीन को विशिष्ट पहचान देने के लिए किसी आदमी को अंगुलियों के निशान या आंखों की पहचान नहीं देनी होगी.

देखें नीचे दी गई वीडियो. अगर किसी वजह से वीडियो न चले तो वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें !

 

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