लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनावों की 10 सीटों के लिए जारी मतदान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के करीबी माने जाने वाले कुंडा से निर्दलीय विधायक राजा भैया बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

हालांकि अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं हो पाई है। यदि ऐसा होता है तो एक अन्य निर्दलीय विधायक विनोद सरोज का वोट भी बीजेपी के पाले में आ सकता है। गौरतलब है कि विनोद सरोज को राजा भैया का प्रबल समर्थक माना जाता है। यदि ऐसा होता है तो समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा भैया के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि यूपी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में राजा भैया के एक समर्थक यशवंत सिंह को मंत्री पद दिया जा सकता है।

यशवंत सिंह ने अपनी MLC की सीट योगी आदित्यनाथ के लिए छोड़ दी थी। यह खबर भी सूत्रों के हवाले से आई है। आपको बता दें कि पहले ही निर्दिलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने अपना वोट भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट देने की बात कही है।

वहीं, बहुजन समाज पार्टी के विधायक अनिल सिंह और समाजवादी पार्टी के विधायक नितिन अग्रवाल द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की खबरें हैं। इन दोनों ही विधायकों ने खुले तौर पर बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की है।

अब क्या होगा सपा और बसपा का?

नितिन अग्रवाल और अनिल सिंह के बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के बाद बीएसपी प्रत्याशी मुश्किल में फंस गए हैं। दरअसल, उत्‍तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी प्रत्याशी को कम से कम 37 प्रथम वरीयता की वोटों की जरूरत है।

राज्य की 403 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास कुल 324 सीटें हैं ऐसे में बीजेपी अपने 8 प्रत्याशियों को आसानी से राज्यसभा में भेज सकती है। इसके बावजूद उसके पास 28 वोट बच जाएंगे। समाजवादी पार्टी के पास 47 विधायक हैं.

ऐसे में वह अपने एक प्रत्याशी को आसानी से जिता सकती है और उसके पास 10 वोट बच जाएंगे। बहुजन समाज पार्टी के पास 19 विधायक हैं और वह अपने दम पर किसी प्रत्याशी को राज्यसभा नहीं भेज सकती। इसके लिए उसे सपा के 10, कांग्रेस के 7 और राष्ट्रीय लोकदल के एक विधायक का समर्थन चाहिए।

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