प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 फरवरी को पुडुचेरी की एक जनसभा में कहा कि देश को गांधी-नेहरू परिवार के प्रत्यक्ष या परोक्ष शासन की तुलना उनके 48 महीने के शासन से करनी चाहिए। वे पंडित जवाहर लाल नेहरू के 17 वर्ष, इंदिरा गांधी के 14 वर्ष, राजीव गांधी के 5 वर्ष और यूपीए के 10 वर्ष के शासन की बात कर रहे थे।

दरअसल यह तथ्य जानने योग्य है कि इन 48 महीनों में देश जिस विश्वास और गति से आगे बढ़ रहा है उतना पहले क्यों नहीं हो सका?  सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल, रक्षा, आंतरिक सुरक्षा से लेकर विदेश नीति तक में यह फर्क साफ देखा जा जा सकता है। आइये हम भी कुछ बिंदुओं के आधार पर इस अंतर को समझते हैं।

फर्क नंबर -1
निरा़शावाद से आशावाद की ओर बढ़ा भारत
26 मई, 2014 को जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश का नेतृत्व अपने जिम्मे लिया तो चारो ओर घोर निराशावाद की छाया थी। कांग्रेस के शासन काल में टू जी, कोल स्कैम, आदर्श घोटाला, बोफोर्स, मारूति घोटाला, मूंदड़ा स्कैम जैसी बातें सुनते हुए आम जनता परेशान थी। राजनीतिज्ञों को लुटेरों की जमात माना जाने लगा था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी देश की संसद में प्रवेश से पहले लोकतंत्र के इस मंदिर पर सिर नवाया तो देश को आशावाद के एक नये झोंके का अहसास हुआ।

पीएम मोदी के अब तक के कार्यकाल में नकारात्मकता पर हर घड़ी प्रहार होता चला गया और सकारात्मकता का संचार रग-रग में करवाने का भरपूर प्रयास होता रहा। समाज के किसी भी तबके को भेदभाव का अहसास न हो इसके लिए सबका साथ, सबका विकास नीति अपनाई गई है।

फर्क नंबर -2
देश के हर हिस्से में बराबरी के साथ विकास
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि भारत के विकास का दरवाजा पूर्व से खुलता है। उनकी नीतियों में ये स्पष्ट दिखता भी है। पूर्वत्तर के सभी राज्यों- असम, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मिरोजरम, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम को केंद्र सरकार की नीतियों में अहम स्थान दिया गया है। वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर, खेलकूद के लेकर कृषि विकास तक को प्राथमिकता दी जा रही है। दूसरी ओर पूर्वी क्षेत्र के बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास पर अधिक बल देकर समृद्धि की राह दिखा रहे हैं। बरौनी, सिंदरी, गोरखपुर में खाद कारखाना का जीर्णोद्धार। मधेपुरा और छपरा में रेल कारखानों में उत्पादन। गुजरात से गोरखपुर तक गैस पाइपलाइन बिछाने जैसे कार्य इस क्षेत्र के विकास के लिए अभूतपूर्व हैं।

फर्क नंबर -3
अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता के साथ बढ़ोतरी
2014 से पहले देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल थी। विकास दर औसतन 4.2 पर आ गई थी। विदेशी निवेश आ नहीं रहे थे और देशी कंपनियों का रुझान अपने ही देश के प्रति कम हो रहा था। लेकिन सत्ता बदली तो सूरत ए हाल भी बदला। देश बीते तीन वर्षों में औसतन 7.1 प्रतिशत की गति से विकास कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 403 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। विदेशी निवेश में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। देश का शेयर बाजार भी यूपीए सरकार के 25 हजार की तुलना में 34 हजार के पार है। नोटबंदी जैसे कदम से जहां भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम लगाने के उठाए गए। जीएसटी के आने से देश वन नेशन, वन टैक्स के दायरे में आ गया। जीएसटी के लग जाने से 30 अरब रुपये के डीजल की बचत होने लगी। आधार को बैंकिंग व्यवस्था और सब्सिडी सिस्टम से जोड़ने के बाद घपलों पर रोक लगी। आधार से जुड़ने के कारण ही अब तक चार करोड़ से अधिक फर्जी राशन कार्ड पकड़ाए जा चुके हैं।

फर्क नंबर -4
भ्रष्टाचार खत्म करने की ओर उठाए सशक्त कदम
आज भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों की संपत्तियां जब्त की जा रहीं हैं। रिश्वतखोरी जैसी बुराईयों पर नकेल कसा गया है। बैंकिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी होने के कारण ही आज हजारों करोड़ के घोटाले पकड़े जा रहे हैं। इंसोलवेंसी एंड बैंकरप्सी कानून, पीएसबी पुनर्पूंजीकरण, एफआरडीआई विधेयक, पूंजी अधिग्रहण योजना, बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम, फरार आर्थिक अपराधी विधेयक… जैसे कई कानून लाकर देश का पैसा लूटने वालों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। ऐसे ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम और आधार की अनिवार्यता के जरिये भी भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसा जा रहा है।

फर्क नंबर -5
विदेश नीति में स्पष्टता के साथ दृढ़ता   
भारत की विदेश नीति कांग्रेस की सरकारों की तुलना में अधिक स्पष्ट है। आज भारत किसी गुट का हिस्सा नहीं है, लेकिन आपस में दो दुश्मन देश अमेरिका और रूस दोनों ही दोस्त हैं। इजरायल के साथ संबंधों को जहां नया आयाम मिला है वहीं फिलीस्तीन जैसे राष्ट्र से हमारे संबंध पूर्ववत हैं। यूरोपियन यूनियन और अफ्रीकी देश भी भारत से अधिक करीब हुए हैं। मुस्लिम देश होने के बावजूद भारत पाकिस्तान को मुस्लिम देशों से अलग-थलग करने में सफल हुआ है। डोकलाम पठार में जब चीन ने कब्जा करने की कोशिश की तो भारत ने दृढ़ता के साथ चीन को वापस लौटने पर मजबूर किया। सार्क सेटेलाइट के जरिये भारत ने अपने पड़ोसी देशों के बेहतर संबंधों को एक नई शुरुआत दी।

फर्क नंबर -6
आंतरिक सुरक्षा में लगातार सफलता
बीते साढ़े तीन वर्षों में भारत ने आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किए हैं। पूर्वोत्तर में उग्रवाद पर जहां लगाम लग गया है वहीं जम्मू-कश्मीर को छोड़कर देश के भीतर कोई बड़ी आतंकी वारदात नहीं होने दी गई है। किसी भी आशंका को वक्त रहते निष्फल किया जाना आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर इनपुट से संभव हो सका है। दिल्ली के बजाय देश के अन्य राज्यों में आंतरिक सुरक्षा को लेकर पुलिस महानिदेशकों की बैठक ने इसमें मजबूती दी है। बाटला हाउस कांड का फरार आतंकी आरिज उर्फ जुनैद, महाबोधि मंदिर विस्फोट का आरोपी आतंकी और लाल किला हमले का वांछित आतंकी बिलाल जैसों का पकड़ा जाना आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ी सफलता है।

फर्क नंबर – 7
रक्षा क्षेत्र में सशक्तिकरण, दुश्मनों को साफ संदेश
रक्षा के क्षेत्र में देश आत्मनिर्भर होने की राह पर है। दूसरी ओर राफेल विमानों का सौदा और एस-400 एंटी मिसाइल टैंक जैसे रक्षा सौदे देश की सुरक्षा के लिए बेहतरीन हैं। अत्याधुनिक रायफल और मेटल बुलेट प्रूफ जैकेट के आयात बड़े फैसले हैं। इसी तरह इजरायल से किलर ड्रोन जैसे सौदे देश को रक्षा क्षेत्र में जबरदस्त मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही देश की सेना को भी अपनी जरूरतों के सामान खरीदने में छूट दी गई है और टेक्नोलॉजी के जरिये देश की सेना को और सशक्त किया जा रहा है। नौसेना के क्षेत्र में भी भारत ने परमाणु हथियारों से लैस कई सबमरीन भी समुद्र में उतारे हैं। आज दुश्मन देश कितना भी ताकतवर हो भारत की ओर आंख उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है।

फर्क नंबर- 8
सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को मिला ऊंचा स्थान
पूरे विश्व को एक सूत्र में जोड़े रखने की योग शक्ति को तब नया मुकाम मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनथक प्रयास के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने हर वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। भारत में जन्मी योग पद्धति के चाहने वाले पूरी दुनिया में हैं। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का मोदी मंत्र दुनिया के देशों को भी भाया और इसी कारण पीएम मोदी की पहल को 192 देशों का समर्थन मिला। 177 देश योग के सह प्रायोजक के तौर पर इस आयोजन से जुड़ भी गए। 21 जून 2015 को विश्व के अलग-अलग देशों में योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया और पूरी दुनिया योग शक्ति से आपस में जुड़ी हुई महसूस होने लगी। एक भारत, श्रेष्ठ भारत के जरिये देश के भीतर आपसी बंधुत्व को बढ़ावा दिए जाने जैसा कार्यक्रम भी कमाल है। इससे जहां देश में भाषाई आधार पर विद्वेष को खत्म करने की कवायद है।

The Prime Minister, Shri Narendra Modi at the inauguration of the first edition of Khelo India School Games, at the Indira Gandhi Indoor Stadium, in New Delhi 

फर्क नंबर-9
खेलकूद के क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव
खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बढ़-चढ़कर सामने आते रहे हैं। खिलाड़ियों के लिए उनका संदेश ही रहा है जो खेले, वह खिले। ऐसे मौके कम नहीं जिनमें प्रधानमंत्री मोदी ने टीम स्पर्धा या निजी स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों से स्वयं मिलकर उनका उत्साहवर्धन किया है। राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की परिकल्पना भी अपने आप में अनूठी है। इसी के साथ खेलो इंडिया कार्यक्रम, ओलंपिक टास्कफोर्स का गठन, विशिष्ट एथलीटों को मासिक छात्रवृति, दिव्यांग एथलीटों के लिए प्रशिक्षण केंद्र, खेल प्रतिभाओं की तलाश के लिए पोर्टल और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच समझौते जैसे कई कदम प्रधानमंत्री ने उठाए हैं।

फर्क नंबर- 10
विश्वगुरु बनने की ओर बढ़ चला भारत
किस्से कहानियों में हम सुनते थे कि भारत कभी विश्वगुरु था। भारत पूरी दुनिया की अगुवाई करता था। ये भी सुनते रहे कि 21वीं सदी भारत की है। पूरी दुनिया पर भारत राज करेगा। पीएम मोदी की अगुवाई में भारत ने वो कारनामा कर दिखाया है। 2017 में जब जलवायु परिवर्तन को लेकर पेरिस डील से अमेरिका ने अपने हाथ खींच लिए तो यूरोपियन यूनियन समेत पूरी दुनिया ने भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखा। भारत ने इस अवसर को अपने हाथ से जाने नहीं दिया और पीछे नहीं हटा। भारत ने दुनिया के हित को देखते हुए त्याग किया और इसकी अगुआई करने का मन बना लिया। जाहिर है यह दुनिया में भारत के बढ़ते कद का एक बड़ा उदाहरण है कि विश्व मुश्किल मुद्दों पर भारत से नेतृत्व की अपेक्षा करने लगा है।

 

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