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नेशनल आई इंस्टीट्यूट के डेटा के मुताबिक 42 प्रतिशत अमेरिकी इसकी जद में हैं जो 1971 में 25 प्रतिशत तक सीमित थे. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दूर की वस्तुएं देख सकने में अक्षम लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. दिल्ली के एम्स ने पिछले साल एक अध्ययन में बताया था कि भारत में पांच से 15 आयुवर्ग के बच्चों में हर छह में से एक इस समस्या से ग्रस्त है.

भारत जैसे जिन देशों में यह समस्या पहले बहुत कम रही वहां 2050 तक यह बहुत बढ़ जाएगी. निकट दृष्टि दोष आम तौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों को ज्यादा होता है और यह काला मोतिया रोग (ग्लूकोमा) एवं आंशिक अंधेपन जैसी आंखों की दीर्घकालिक समस्याओं का कारण बन सकता है.

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अत्याधिक तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद बच्चों में निकट दृष्टि दोष बढ़ने के बीच संबंध की पुष्टि करने के लिए कोई ठोस अध्ययन अब तक सामने नहीं आया है लेकिन कई शोधों में इन दोनों के बीच संबंध दिखाया गया है. निकट दृष्टि दोष के चलते बच्चों में धुंधला दिखने की समस्या को लेकर ह्यूस्टन विश्वविद्यालय नेत्र संस्थान बच्चों में इस समस्या को दूर करने के लिए निकट दृष्टि दोष प्रबंधन सेवा उपलब्ध करा रहा है.

अमेरिका के टेक्सास में यह पहली तरह की सेवा होगी. पूर्व में हुए अध्ययनों में बताया गया है कि बच्चों को फोन से दूर रखने, घर से बाहर के खेल-कूद के लिए प्रोत्साहित करने से इस समस्या पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है, दरअसल अब यह रोग ज्यादातर लोगो के DNA में शामिल हो चूका है. जिससे उनकी सन्तानो पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है. बस यह प्रभाव ज्यादा न बड़े और आगे उनकी सन्तानो पर इसका प्रभाव काम हो इसलिए फ़ोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टीवी आदि से दूर रहने की सलाह दी जा रही है.

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